जेता बेरा (कुआँ) - जोधपुर
जोधपुर शहर के परकोटे के भीतर मुहणोत नेणसी की हवेली और चाँद बावड़ी के सामने स्थित है जेता बेरा (कुआ)
इस कुए का निर्माण मेहरानगढ़ दुर्ग के निर्माण के साथ हुवा होगा क्योकि ये दुर्ग की तलहटी का वो प्राथमिक भाग है जहा से बसावट होनी प्रारम्भ हुई। इस बेरे निर्माण मूथा जेता ने राव जोधाजी के शासन काल में करवाया था (स्रोत -राजस्थान के कुऍ और बावडिया -वाई.डी.सिंह ) इस कुए का पानी अत्यंत मीठा और औषधीय गुणों युक्त माना जाता है। प्रारम्भ में केवल राज परिवार के लिए उपयोग में लाया जाता था किन्तु बाद में निरंतर आकाल से त्रस्त जनता को राहत देने के लिए महाराजा तखत सिंह जी ने आम जनता के उपयोग हेतु अनुमति प्रदान कर दी। वाई.डी.सिंह के अनुसार पूर्व में इस कुए के आसपास देवलिये बने हुवे थे जिन्हे औरंगजेब शासनकाल में हिन्दू मंदिरो और मूर्तियों को नष्ट करने के शाही फरमान के चलते गिरा दिए गए थे जिन्हे बाद में महाराजा अजित सिंह जी के शासन काल में पुनः निर्मित करवाया गया था। कुए के बाहर और पार्श्व में नीचे की तरफ प्याऊ के पास चबूतरे बने हुवे है जिस पर स्थानीय निवासियों द्वारा हथाई (चौपाल) की जाती है। वर्तमान में कुए के पीछे की तरफ बड़ के वृक्ष के नीचे एक मंदिर है और एक और कुआ है।
जेता बेरा के समीप हमारा पैतृक मकान हुआ करता था इसलिए मै व्यक्तिगत रूप से इस कुए के मीठे पानी के औषधीय गुणों से वाकिफ हु। इस कुए के सामने बचपन में खूब खेले है। कुए से थोड़ा आगे ऊपर की और स्थित रानी सागर और पदम सागर जलाशय का जल भूमिगत सीरो के माध्यम से इस कुए में आता है। स्थानीय निवासियों द्वारा आज भी इस कुए की स्वछता और पवित्रता का ध्यान रखा जाता है आज भी आप चप्पल या जुते पहन कर इसमें प्रवेश नहीं कर सकते है। नगर की हवेलियों और विरासत स्थलों के बाहर नगर निगम द्वारा बनवाई गई बचकानी चित्रकारी की मै व्यक्तिगत रूप भर्त्सना करता हु। इससे बेहतर होता की आप इन विरासत स्थलों की जानकारी के सम्बन्ध में शालीन सुचना पट्ट अंकित कर देते। ये चटख नीला रंग जोधपुर के विरासतीय नीले रंग से बिलकुल मेल नहीं खाता है।
शरद व्यास
जोधपुर -31 .07 .2022
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