Monday, 27 October 2025

खेड़ब्रह्मा मंदिर ,गुजरात । Khedbramha Temple । Sabarkantha ।Gujrat

गुजरात के साबरकांठा जिले में हरनव नदी के किनारे खेड़ब्रह्मा में ब्रह्माजी का प्राचीन मंदिर स्थित है जो प्रसिद्द इतिहासकार एम.ए. ढाकी के अनुसार 11वीं शताब्दी में सोलंकी शासक कर्ण द्वारा बनवाया गया था। (Wikipedia) कर्णदेव प्रथम (1066-1094 ई.) पाटन के प्रसिद्द शासक जयसिंह सिद्धराज के पिता थे।

मदिर के अंदर शिखर की छत और स्तम्भों को छोड़ कर सारा भाग और मुर्तिया नवीन प्रतीत होती है। गर्भगृह में स्वेत प्रस्तर से निर्मित कमलासन में ब्रह्माजी की चार मुख्य वाली एवं चतुर्भुज प्रतिमा है। प्रतिमा के दक्षिण ओर के नीचे के हाथ में जपमाला तथा ऊपरी हाथ में श्रुवा है तथा बाए ओर के ऊपरी हाथ में पुस्तक तथा नीचे के हाथ में कमंडल है। ब्रह्माजी की प्रतिमा के बायीं ओर सावित्री माता तथा दायी ओर गायत्री माता की प्रतिमाए विराजित है। सामने ब्रह्माजी के वाहन हंस की प्रतिमा स्थित है।
इस प्राचीन मंदिर का अनेक बार जीर्णोद्धार हुवा प्रतीत होता है। मंदिर की बाह्य दीवारों में दिक्पालों तथा अप्सराओ की मुर्तिया है तथा तीनो तरफ निर्मित ताको में ब्रह्माजी की मुर्तिया स्थापित है। मंदिर की बाह्य दीवार पर पीला रंग पोता हुवा है जिसे हटाया जाना जरुरी है। मंदिर की जगती या प्लेटफार्म के मूल भाग को छोड़ कर बाकी सारा मंदिर अलग अलग कालखंडो में पुननिर्मित किया गया प्रतीत होता है।
मंदिर के सामने एक प्राचीन कलात्मक बावड़ी स्थित है जिसका हुमड़ जैन समाज और खेड़ावल ब्राह्मण समाज के उद्भव से विशेष सम्बन्ध है। हूमड़ जैन समाज के इतिहास के अनुसार नन्दी संघ के आचार्य मागनन्दी के शिष्य मुनि हेमचन्द्र अथवा हुमाचार्य खेड़ब्रह्मा द्वारा स्थानीय जैन मतावलंबियों एवं अन्य क्षत्रियों तथा वैश्यों को संगठित कर एक जैन समाज के नए गोत्रो की स्थापना की गई थी जिन्हे आज हूमड़ समाज के नाम से जाना जाता है । इन्होंने हूमड़ों के 18 गौत्र निर्धारित किये तथा क्षत्रियों के विविध संस्कारों को सम्पन्न कराने वाले पुराहितों को “ खेडुवा “ नाम दिया और उनके 9 गोत्र भी इसी बावड़ी में स्थापित किये थे।
बावड़ी में हूमड़ों के 18 गोत्र की मातृकाओं के तथा खेड़ावल ब्राह्मणो के 9 गोत्रो की मातृकाओं के 9 गवाक्षो या ताके बावड़ी में मौजूद हैं। ताको में से मुर्तिया गायब हो चुकी है। बावड़ी में इस आशय का एक सूचनापट्ट भी लगा हुवा है। बावड़ी की साफ़ सफाई की सख्त आवश्यकता है।
जब मै खेड़ब्रह्मा गया था तब हरनव नदी का जल स्तर बहुत कम था। नदी के किनारे तथा पुल के आगे कुछ पुराने मंदिर देखे जा सकते है जिनमे पंखनाथ महादेव मन्दिर भी अत्यंत प्रसिद्ध हैं। खेड़ब्रह्मा के बस स्टेण्ड के समीप ही अम्बाजी का प्रसिद्द मंदिर है।

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